Migraine : Symptoms, Causes and Treatments

Migraine : Symptoms, Causes and Treatment

माइग्रेन (Migraine) एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी को बार-बार हल्के से लेकर गंभीर सिरदर्द (headache) होता है।

माइग्रेन (Migraine) आमतौर पर एक हिस्से को प्रभावित करता है। यह 2 से लेकर 72 घंटों तक बना रह सकता है।

माइग्रेन का हमला (Migraine attack) अचानक होता है। कई बार यह शुरू में हल्का होता है, लेकिन धीरे-धीरे बहुत तेज दर्द में बदल जाता है।

अधिकतर यह सिरदर्द के साथ शुरू होता है और कनपटी में बहुत तीव्रता से टीस उठती है या ऐसा लगता है कि कोई कनपटी पर प्रहार कर रहा है।

यह दर्द आधे सिर में होता है, लेकिन एक तिहाई मामलों में दर्द सिर के दोनों ओर भी होता पाया गया है।

migraine

माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर इसकी शुरुआत किशोर उम्र (teen-age) से होती है।

माइग्रेन के ज्यादातर रोगी वे होते हैं, जिनके परिवार में ऐसा इतिहास रहा है।

माइग्रेन के लक्षण (Migraine Symptoms)

माइग्रेन के लक्षण सिरदर्द (headache) से एक से दो दिन पहले ही शुरू हो सकते हैं। इसे प्रोड्रोम स्टेज (prodrom stage) के नाम से जाना जाता है।
इस स्टेज में  माइग्रेन के कुछ लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं, जैसे  :
  • फोटोफोबिया (प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता या प्रकाश से भय)
  • फोनोफोबिया (ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता या भय)
  • थकान या कम ऊर्जा महसूस होना
  • चिड़चिड़ापन आना
  • गर्दन में अकड़न महसूस होना
  • उल्टी आना या महसूस होना

इस दौरान आंखों के आगे अंधेरा छा जाने, शरीर सुन्न पड़ जाने या दिमाग में झन्नाहट का एहसास होता है।

किसी मरीज को अजीब-अजीब सी छायाएं नजर आती हैं। किसी मरीज को चेहरे और हाथों में सुइयां या पिन चुभने का एहसास होता है।

माइग्रेन का दर्द सामान्य तौर पर शारीरिक गतिविधियों (physical activities) से बढ़ता है।

माइग्रेन के सिरदर्द से पीड़ित एक तिहाई लोगों को ऑरा के माध्यम से इसका पूर्वाभास हो जाता है कि शीघ्र ही सिरदर्द होने वाला है।

आमतौर पर माना जाता है कि माइग्रेन पर्यावरणीय (atmospheric) और आनुवांशिकीय (genetic) कारणों के मिश्रण से होता है।

अस्थिर हार्मोन स्तर (unstable hormone levels) भी माइग्रेन का एक मुख्य कारण है।

माइग्रेन (migraine) यौवन पूर्व की उम्र वाली लड़कियों को लड़कों की अपेक्षा थोड़ा अधिक प्रभावित करता है लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दो से तीन गुना अधिक प्रभावित करता है।

यह न्यूरोवेस्कुलर विकार (neurovascular disorder) के नाम से भी जाना  जाता है।

माइग्रेन में अक्सर जी मिचलाता है और उल्टी (vomit) भी हो जाती है। माइग्रेन का अटैक होने पर मरीज को रोशनी, आवाज या किसी तरह की गंध अच्छी नहीं लगती।

माइग्रेन के प्रकार (Types of Migraine)

माइग्रेन के तीन प्रकार के बताये जाते हैं:

  • सामान्य माइग्रेन (Normal Migraine) : यह माइग्रेन फोनोफोबिया और फोटोफोबिया के साथ होता है।
  • क्लासिक माइग्रेन (Classic Migraine) : इस प्रकार के माइग्रेन में विभिन्न वस्तुएं चमकीली दिखायी पड़ती हैं। जिगजैग पैटर्न यानी टेढ़े-मेढ़े स्वरूप में चटख रंगीन चमचमाती रोशनियां दिखाई पड़ती है या द्रष्टि क्षेत्र में एक छिद्र दिखाई पड़ता है, जिसे ब्लाइंड स्पॉट कहते है।
  • जटिल माइग्रेन (Complex Migraine) : ऐसे माइग्रेन में मस्तिष्क के ठीक से काम न करने की वजह से सिरदर्द होता है।

माइग्रेन के कारण (Causes of Migraine)

माइग्रेन (migraine) के बहुत से कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं :

  • तनाव (stress) होना
  • लगातार कई दिनों तक नींद पूरी न होना
  • हार्मोनल परिवर्तन (hormonal changes)
  • शारीरिक थकान (physical fatigue)
  • कब्ज़ (constipation)
  • नशीली दवाओं व शराब का सेवन (intake of drugs and alcohol)

कॉफी (coffee) का अत्यधिक सेवन (चार कप से अधिक), किसी प्रकार की गंध (smell) और सिगरेट का धुआं (cigarette smoke) भी माइग्रेन का कारण बन सकते हैं।

20 से 55 वर्ष की आयु के ऐसे लोग जिनकी कमर के क्षेत्र (waist area) में अत्यधिक चर्बी है उन्हें माइग्रेन होने का खतरा औरों की तुलना में अधिक होता है।

अत्यधिक मोटे या तोंद वाले लोगों में माइग्रेन की संभावना भी अधिक होती है।

माइग्रेन के उपचार (Migraine Treatments)

सभी रोगियों में माइग्रेन के पूर्व संकेत या लक्षण (ट्रिगर्स) एक जैसे नहीं होते। इसलिए इन्हें डायरी में लिखना आपके लिए उपयोगी हो सकता है।

इसके बाद दवा की सहायता से इन ट्रिगर्स से सही समय पर माइग्रेन से बचा जा सकता है।

  • कभी-कभार माइग्रेन का दर्द बहुत हल्का होता है जो हमारे दैनिक काम को प्रभावित नहीं करता।
  • विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे रोगी बिना किसी डाक्टरी राय (medical opinion) के सीधे दवाई विक्रेता से मिलने वाले आम दर्दमारक (pain-killers) दवाइयां ले सकते हैं, जैसे कि ब्रूफेन,  नैप्रा, क्रोसीन या डिस्प्रिन आदि।
  • बहुत ज्यादा या तीव्र दर्द होने पर दो प्रकार की दवाएं काफी प्रभावशाली होती हैं।
  • पहली- जलन मिटाने वाली कैफीन रहित गोलियां नैप्रा-डी, नैक्सडॉम और मेफ्टल फोर्ट। और दूसरी ट्रिप्टान दवाएं- जैसे कि सुमिनेट टैब्लेट, नैसाल स्प्रे या इंजेक्शन, राइज़ैक्ट या फिर ज़ोमिग। इन दवाओं को रोगियों को सदा अपने साथ रखना चाहिए। पहले ट्रिप्टान दवाएं रोगी को तब दी जाती थीं, जब माइग्रेन पर आम पेन किलर्स का कोई असर नहीं होता था। इसके बाद नए शोधों में पाया गया कि भीषण दर्द में सीधे ही ट्रिप्टान दवाओं का सहारा लेना अधिक कारगर सिद्ध होता है। ट्रिप्टान दवाएं दर्द शुरू होने से पहले, या मामूली दर्द शुरू हो जाने पर भी ली जा सकती हैं। इससे इनका असर बढ़ जाता है और साइड इफैक्ट भी कम हो जाता है। ऐसा करके माइग्रेन के 80% असर को दो घंटे में खत्म किया जा सकता है और अगले 24 घंटों में माइग्रेन के दर्द की संभावना भी नहीं रहती।

कुछ दवाएं (medicines) ऐसी हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह और मार्गदर्शन (doctor’s advice and guidance) से ही लिया जा सकता है।

इन्हें एर्गोटैमिन्स के नाम से भी जाना जाता है। इस श्रेणी में एर्गोमार, कैफरगोट, माइग्रेनल, वाइग्रेन और डीएचई-45 आती हैं।

ट्रिप्टान दवाओं की तरह ये भी अन्य धमनियों को तो खोलती हैं, लेकिन हृदय की धमनियों को कुछ ज्यादा ही खोल देती हैं, इसलिए कम सुरक्षित मानी जाती हैं।

यहां खास ध्यान योग्य बात है कि कई बार सिरदर्द दूसरी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का भी संकेत होता है।

योग द्वारा (By Yoga)

योग से माइग्रेन की समस्या से काफी हद तक निजात पायी जा सकती है।

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सुबह-शाम योगाभ्यास में ब्रह्म मुद्रा, कंध संचालन, मार्जरासन, शशकासन के पश्चात प्राणायाम करें। रात्रि को बिना तकिए के सोएं।

होम्योपैथी द्वारा (By Homeopathy)

होम्योपैथी में भी इसका उपचार दिया गया है। इसके लिए ब्रायोनिया-30, ग्लोनाइन-30, बैलाडोना-30, आइरिस वी -30 या जेलसीमियम-30 नामक दवाइयों की की चार-चार बूंदें दिन में चार बार लेने से भी आराम मिलता है।

सर्जरी द्वारा (By Surgery)

वैज्ञानिको के अनुसार, जो लोग माइग्रेन के दर्द से पीड़ित होते हैं उन्हें छोटी-सी सर्जरी से फ़ायदा हो सकता है।

अमरीकी डॉक्टरों का मानना है कि यदि माथे और गर्दन की कुछ माँसपेशियाँ को हटा दिया जाए तो इससे माइग्रेन से छुटकारा पाया जा सकता है।

इन डॉक्टरों ने एक साल में माइग्रेन से पीड़ित सौ लोगों की सर्जरी की। इस स्टडी में पाया गया कि इनमें से 90 लोगों को या तो माइग्रेन से बिलकुल छुटकारा मिला या फिर उसमें भारी कमी पाई गयी।

घरेलू उपचार से (By Home Remedies)

इस बीमारी में कई घरेलू उपचार भी किए जा सकते हैं, जैसे :

सिर की मालिश :

माइग्रेन में रोगी के सिर, कंधों और गर्दन की मालिश करनी चाहिए। यह इस दर्द से आराम दिलाने बहुत सहायक हो सकता है।

इसके लिए हल्की खुश्बू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

अरोमा थेरेपी :

अरोमा थेरेपी माइग्रेन के दर्द से काफ़ी आराम पहुंचाता है।

इस थेरेपी में हर्बल तेलों को एक तकनीक के माध्यम से हवा में फैला दिया जाता है या फिर इसको भाप के द्वारा चेहरे पर डाला जाता है।

इसके साथ हल्का संगीतक भी चलाया जाता है जो दिमाग को आराम पहुँचाता है।

धीमी गति से साँस लें :

इसमें रोगी को साँस की गति को थोड़ा धीमा करके, लंबी साँसे लेने की कोशिश करनी चाहिए।

यह तरीका दर्द के साथ होने वाली बेचैनी से राहत दिलाने में आपकी मदद करेगा।

ठंडे या गर्म पानी की हल्की मालिश :

एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें।

कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है।

इसके लिए आप बर्फ के कुछ टुकड़ों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

आजकल डिब्बाबंद पदार्थों और जंक फूड का काफी चलन है।

इनमें मैदे का बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होता है, यदि आपको माइग्रेन (migraine) की शिकायत है तो आप इन पदार्थों का सेवन कतई न करें।

पनीर, चाकलेट, चीज, नूडल्स, पके केले और कुछ प्रकार के नट्स में ऐसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं।

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