Apke Attitude Ko Decide karne Wale Factors Kaun Se Hain?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा कराए गए  एक अध्यायन के मुताबिक, 85% मौकों  पर किसी इंसान को नौकरी या तरक्की उसके नजरिये (attitude) की वजह से मिलती है, जबकि अक्लमंदी या खास तथ्यों और आंकड़ों की जानकारी की वजह से केवल 15% मौकों पर ही मिलती है।  ताज्जुब की बात है कि जिंदगी में कामयाबी दिलाने के तथ्यों और आंकड़ों की केवल 15% हिस्सेदारी होती है, पर शिक्षा की मद की सारी रकम इन्हीं चीजों को पढ़ाने में खर्च की जाती है। हमारा क्षेत्र चाहे जो हो, कामयाबी की बुनियाद तो नजरिया (attitude) ही है।


आपके नज़रिए को तय करने वाले कारक (Factors That Determine Your Attitude) :

मैं आपसे कुछ सवाल पूछता हूँ – हम नज़रिए (attitude) के साथ ही जन्म लेते हैं, या उसे बड़ा होने पर विकसित करते हैं? हमारा नजरिया किन चीजों से बनता है? अगर माहौल की वजह से जिंदगी के बारे में आपका नजरिया नकारात्मक (negative) हो गया है, तो क्या आप उसे बदल सकते हैं?
दरअसल हमारे नज़रिए (attitude) का ज्यादातर हिस्सा हमारी जिंदगी के शुरूआती सालों में ही बन जाता है।
यह सच है कि हम अपने मिजाज की कुछ खासियतों (tendencies) के साथ पैदा होते हैं, लेकिन बाद में हमारा जो नज़रिया बनता है, उसे खास तौर से ये तीन चीजें (factors) तय करती हैं : माहौल (Environment), अनुभव (Experiences) और शिक्षा (Education).

           

आइये, अब इन तीनों पर नजर डालते हैं :

1. माहौल (Environment) :

माहौल में ये चीजें शामिल होती हैं –

  • घर – अच्छा या बुरा असर (Home-positive or negative influences)
  • स्कूल- साथियों का दबाव (School-peer pressure)
  •  काम – मददगार, या ज़रूरत से अधिक नुक्ताचीनी करने वाला सुपरवाइजर (Work – supportive or over critical supervisor)
  • मीडिया – टेलीविजन, अखबार, पत्रिकाएँ, रेडियो, फिल्में (Media – television, newspaper, magazines, radio, movies)
  • सांस्कृतिक पृष्ठभूमि (Cultural background)
  • धार्मिक पृष्ठभूमि (Religious background)
  • परंपराएँ और मान्यताएँ (Traditions and beliefs)
  • सामाजिक माहौल (Social environment)
  • राजनीतिक माहौल (Political environment)


ऊपर बताए गए सारे माहौल (environment) मिल कर हमारी तहजीब बनाते हैं। घर हो, संस्था हो, या देश हो – हर जगह की अपनी एक तहज़ीब होती है। उदाहरण के तौर पर, आप एक स्टोर में जाते हैं, तो वहाँ के मैनेजर से लेकर सेल्स क्लर्क (sales clerk) तक को विनम्र, मददगार, दोस्ताना और खुशमिज़ाज़ से भरा पाते हैं. फिर आप दूसरी दुकान में जाते हैं, तो वहाँ काम करने वालों को रूखा और बदतमीज़ पाते हैं।
आप एक घर में जाते हैं, तो वहाँ माँ-बाप और बच्चों को तमीजवाला, मिलनसार और दूसरों का ख्याल रखने वाला पाते हैं, जबकि दूसरे घर में जाने पर हर आदमी को कुत्ते-बिल्लियों की तरह आपस में लड़ता पाते हैं।
जिन देशों की सरकारों और राजनीतिक माहौल में ईमानदारी होती है, वहाँ के लोग भी आम तौर पर ईमानदार, कानून का पालन करने वाले और मददगार होते हैं। इसका उलटा भी उतना ही सही हैं। जिस तरह बेईमान और भ्रष्ट माहौल में एक ईमानदार आदमी का जीना मुश्किल हो जाता है, उसी तरह ईमानदारी से भरे माहौल में बेईमान व्यक्ति को मुश्किल होती है। अच्छे माहौल में मामूली कर्मचारी की भी काम करने की शक्ति बढ़ जाती है, जबकि बुरे माहौल में अच्छा काम करने वाले की काम करने की शक्ति घट जाती है।

Attitude
तहज़ीब (culture) कभी नीचे से ऊपर की ओर नहीं जाती है बल्कि वह हमेशा ऊपर से नीचे की ओर आती है। हमें पीछे मुड़ कर देखना चाहिए कि हमने खुद के लिए और अपने आसपास के लोगों के लिए कैसा माहौल तैयार किया है। बुरे माहौल में लोगों से अच्छे व्यवहार की आशा नहीं की जा सकती। जहाँ कानून का न होना ही कानून बन जाता हो, वहाँ ईमानदार नागरिक भी चोर, उचक्के और बेईमान हो जाते हैं।
कुछ समय निकाल कर इस बात का गौर कीजिए कि हमारा माहौल हम पर कैसे असर डालता है, और हम जो माहौल तैयार करते हैं, वह दूसरों पर कैसे असर डालता है?

2. तजरबा (Experience) :

अलग-अलग लोगों से मिले तजरबे (experiences) के मुताबिक हमारा व्यवहार भी बदल जाता है। अगर किसी इंसान के साथ हमें अच्छा अनुभव मिलता है, तो उसके बारे में हमारा नजरिया अच्छा होता है, पर बुरा अनुभव मिलने पर हम सावधान हो जाते हैं। अनुभव और घटनाएँ हमारी जिंदगी के संदर्भ बिंदु (reference point) बन जाते हैं। हम उनसे नतीजे निकालते हैं, जो भविष्य के लिए मार्गदर्शन (guidelines) की भूमिका निभाते हैं।

3. शिक्षा (Education) :

शिक्षा (education) औपचारिक (formal), और अनौपचारिक (informal), दोनों तरह की होती है। आजकल हमलोग सूचनाओं के सागर में गोते लगा रहे हैं, लेकिन ज्ञान और समझदारी का अकाल पड़ा हुआ है। ज्ञान को योजनावद्ध ढंग से समझदारी में बदला जा सकता है, और समझदारी हमें कामयाबी दिलाती है।
शिक्षक की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण होती है। उसका प्रभाव अनंत काल (eternity) तक रहता है। इसके असर की लहर अनगिनत हैं।

शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो हम केवल रोजी-रोटी कमाना नहीं बल्कि जीने का तरीका भी सिखाए।

(शिव खेड़ा की किताब जीत आपकी  से)

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