Earthquake : Its Origin, Types and Measurement

Earthquake : Its origin, Types and Measurement

भूकंप या भूचाल (Earthquake)

पृथ्वी के भूपटल में किसी ज्ञात या अज्ञात, अनतर्जात या बाह्य, प्राकृतिक या कृत्रिम कारणों से पृथ्वी के स्थलमंडल (Lithosphere) में होने वाला कम्पन ही भूकंप (Earthquake) है. यह भूपटल में असंतुलन की दशा का परिचायक होता है तथा धरातल पर विनाशकारी प्रभावों का जनक भी। पृथ्वी की भूपर्पटी सबसे ऊपरी परत है, जो काफी पतली है और इसकी चट्टानें आतंरिक भाग की चट्टानों से अपेक्षाकृत ठंडी एवं कोमल हैं। भूकंप आने का सबसे महत्वपूर्ण कारण भ्रंशन क्रिया (Faulting) है। भ्रंश पृथ्वी की भूपर्पटी में उत्पन्न वह दरार या विभंग है, जिसके सहारे गति उत्पन्न होती है। अधिकांश भूकंप, प्लेटों के सहारे उस संकरे क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं जहां प्लेटें एक-दुसरे से टकराती हैं या फिर एक प्लेट दूसरी प्लेट के बगल से सरकती जाती है।

पृथ्वी की सतह पर, भूकंप अपने आप को, भूमि को हिलाकर या विस्थापित कर के प्रकट करता है। जब एक बड़ा भूकंप उपरिकेंद्र अपतटीय स्थति में होता है, यह समुद्र के किनारे पर पर्याप्त मात्रा में विस्थापन का कारण बनता है, जो सूनामी का कारण है। भूकंप के झटके कभी-कभी भूस्खलन और ज्वालामुखी गतिविधियों को भी पैदा कर सकते हैं।


भूकंप मूल अथवा उत्पत्ति केंद्र (Focus)

धरातल के नीचे जिस स्थान पर भूकंप की घटना का प्रारम्भ होता है उसे भूकंप का उतपत्ति केंद्र या भूकंप मूल कहा जाता है।

भूकंप अधिकेंद्र (Epicentre):-

भूकंप मूल के ठीक ऊपर पृथ्वी तल का वह स्थान, जहां सबसे पहले भूकम्पीय तरंगों का पता चलता है, अधिकेंद्र कहलाता है। भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में अधिकेंद्र ही ऐसा बिंदु है जो भूकंप मूल के निकटतम स्थित होता है।

भूकंपविज्ञान (Seismology):-

भूकंपमापी यन्त्र द्वारा अंकित लहरों का अध्ययन करने वाला विषय या विज्ञानं सीस्मोलॉजी के नाम से जाना जाता है।

भूकंपमापी यंत्र (Seismograph):-

जिस यंत्र के द्वारा भूकम्पीय लहरों का अंकन किया जाता है उसे भूकम्पीय यनयर या सीस्मोग्राफ कहते हैं।

भूकंप के प्रकार (Types of Earthquake):-

भूकंप मूल की गहराई के आधार पर भूकम्पों को 3 वर्गों में रखा जाता है –

1. सामान्य भूकंप (Normal Earthquake):-

ऐसे भूकम्पों में भूकंप मूल धरातल से 50 किमी तक की गहराई पर स्थित होता है।

2. मध्यवर्ती भूकंप (Intermediate Earthquake):-

ऐसे भूकम्पों में उत्पत्ति केंद्र गहराई 50 से 250 किमी तक होती है।

3. गहरे या पातालीय भूकंप (Deep-focus Earthquake):-

इनके केंद्र की गहराई धरातल के नीचे 250 से 700 किमी के बीच होती है। इनके बारे में अभी विशेष जानकारी का आभाव है।


भूकम्पीय तीव्रता का मापन (Measurement of Earthquake Intensity):-

भूकम्पों की तीव्रता का मापन वर्तमान समय में दो पैमानों के आधार पर किया जाता है :-

1. मरकेली पैमाना :-

वर्तमान मरकेली पैमाने पर भूकम्पीय तीव्रता (Earthquake Intensity) का मापन एक से बारह तक के अंकों द्वारा दर्शाया जाता है, जिनका आधार अनुभवात्मक पर्यवेक्षण है।

2. रिक्टर पैमाना (Richter Scale):-

इस पैमाने का विकास सन 1935 में अमेरिकी भूवैज्ञानिक चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर द्वारा किया गया। इसमें 1 से 9 तक की संख्याएँ होती हैं, जिसमें हर आगे वाली संख्या अपने पीछे वाली संख्या के 10 गुने भूकम्पीय परिणाम को प्रस्तुत करती है। इसकी संख्याओं तथा उनके प्रभाव का विवरण इस प्रकार है :-

1. केवल यंत्रों द्वारा ही अनुभव किया जाता है।

2. अधिकेंद्र के समीपवर्ती भागों में हल्का कम्पन महसूस होता है।

3. चट्टानों आदि में सामान्य कम्पन प्रारम्भ हो जाता है।
4. अधिकेंद्र से 32 किमी की त्रिज्या वाले क्षेत्र में इसका अनुभव किया जाता है। क्षेत्र सभी व्यक्तियों को इसका अनुभव हो जाता है।
5. इसका अनुभव अधिकेंद्र से 5000 किमी की दूरी तक होता है। पेड़-पौधे तथा उनकी डालियाँ हिलने लगाती हैं।

6. सामान्यतया विनाशात्मक, दीवारों में दरारें एवं चटकने प्रारम्भ।

7. एक वृहत भूकंप, अत्यंत विस्तृत क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव, विभिन्न महाद्वीपों तक कम्पनों का अनुभव, इमारतें आदि पूर्णतः गिर जाती हैं।

8. विश्वव्यापी प्रभाव, अत्यधिक विनाशात्मक, पेड़ आदि गिर जाते हैं, नदियों का प्रवाह मार्ग बदल जाता है तथा जमीन में गहरी दरारें पड़ जाती हैं।

9. सर्वनाश की स्थिति

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